Washington: भारतीय दवा कंपनियन के अमेरिका से बड़ी राहत: कुछ खास दवईयन पर ना लागी टैरिफ, जानि काहे अहम बा ई फैसला

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Sep 28, 2026

भारतीय दवा कंपनियन खातिर अमेरिका से एगो राहत वाला खबर आइल बा। अमेरिका कुछ खास भारतीय दवियन आ दवा बनावे में इस्तेमाल होखे वाला सामग्री के जीरो टैरिफ वाली लिस्ट में शामिल कइले बा। एह

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भारतीय दवा कंपनियन खातिर अमेरिका से एगो राहत वाला खबर आइल बा। अमेरिका कुछ खास भारतीय दवियन आ दवा बनावे में इस्तेमाल होखे वाला सामग्री के जीरो टैरिफ वाली लिस्ट में शामिल कइले बा। एह फैसला से अमेरिका के बाजार में दवा सप्लाई करे वाली भारतीय फार्मा कंपनियन के राहत मिल सकेला।

अमेरिका भेजल जाए वाला कुछ खास दवियन आ दवा बनावे के कच्चा माल पर अब जीरो अमेरिकी टैरिफ लागू होई। हालांकि, ई छूट भारत से अमेरिका भेजल जाए वाला हर दवा आ फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट पर लागू ना होई। अमेरिका के कॉमर्स डिपार्टमेंट ई लिस्ट ओह समय जारी कइले बा, जब वॉशिंगटन 29 सितंबर से कुछ पेटेंट वाली दवियन आ उनकर सामग्री पर 100 फीसदी टैरिफ लगावे के तैयारी में बा।

कवन-कवन दवा एह लिस्ट में बा?

जीरो टैरिफ वाली लिस्ट में कई तरह के खास मेडिकल प्रोडक्ट शामिल बाड़ें। एहमें ऑरफन ड्रग्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा से बनल थेरेपी, फर्टिलिटी दवा, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी आ एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स शामिल बाड़ें।

एकरा अलावा केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल आ न्यूक्लियर खतरा से निपटे खातिर इस्तेमाल होखे वाला कुछ मेडिकल काउंटरमेजर आ जानवरन के स्वास्थ्य से जुड़ल कुछ प्रोडक्ट के भी एह सूची में जगह मिलल बा।

भारत के साथ अउरी कवन देश बा?

अमेरिका के एह लिस्ट में भारत के साथ अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन आ वियतनाम जइसन देश शामिल बाड़ें।

100 फीसदी टैरिफ के मामला का बा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अप्रैल में जारी आदेश के तहत ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत कुछ खास पेटेंट वाली दवियन आ दवा बनावे में इस्तेमाल होखे वाला इंग्रीडिएंट पर 100 फीसदी टैरिफ लगावे के फैसला भइल रहे। कुछ कंपनियन खातिर ई नियम 31 जुलाई से लागू भइल, जबकि बाकी कंपनियन पर 29 सितंबर से लागू होखे वाला बा।

हालांकि, कॉमर्स डिपार्टमेंट के नोटिस के मुताबिक जेनेरिक दवियन आ ओहसे जुड़ल इंग्रीडिएंट पर सेक्शन 232 के तहत ई दवा टैरिफ लागू ना होई। भारत खातिर ई बात खास महत्व रखेले, काहेकि अमेरिका के भारतीय दवा एक्सपोर्ट में जेनेरिक दवियन के हिस्सा काफी बड़ बा।

भारत पर का पड़ी असर?

भारत दुनिया के प्रमुख जेनेरिक दवा निर्माता देशन में शामिल बा आ अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम खातिर भी एगो महत्वपूर्ण सप्लायर ह। भारतीय कंपनियन से अमेरिका के अस्पताल, फार्मेसी आ मरीज खातिर तैयार दवा के साथ-साथ एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स भी सप्लाई होखेला।

एह फैसला से भारतीय कंपनियन के कुछ महंगा आ खास तरह के थेरेपी वाली दवियन के अमेरिका में बिना ड्यूटी सप्लाई जारी रखे के रास्ता मिल सकेला। साथ ही, अमेरिका घरेलू स्तर पर दवा निर्माण बढ़ावे खातिर टैरिफ के इस्तेमाल कर रहल बा। एह स्थिति में जीरो टैरिफ वाली ई छूट भारतीय फार्मा सेक्टर खातिर महत्वपूर्ण राहत मानल जा रहल बा।

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