छाप 3.0: मोबाइल में उलझल युवा पीढ़ी के किताब आ साहित्य से जोड़े के अनूठा पहल

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Oct 3, 2026

जमशेदपुर: आज के समय में मोबाइल फोन हमनी के जिंदगी के एगो जरूरी हिस्सा बन गइल बा। पढ़ाई से लेके खरीदारी, बातचीत से लेके मनोरंजन तक, हर काम मोबाइल के माध्यम से हो रहल बा।

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जमशेदपुर: आज के समय में मोबाइल फोन हमनी के जिंदगी के एगो जरूरी हिस्सा बन गइल बा। पढ़ाई से लेके खरीदारी, बातचीत से लेके मनोरंजन तक, हर काम मोबाइल के माध्यम से हो रहल बा। खासकर युवा पीढ़ी के बीच मोबाइल के बढ़त इस्तेमाल के चलते किताब पढ़े, लिखे आ साहित्य से जुड़ल आदत धीरे-धीरे कम होत जा रहल बा। अइसन समय में साहित्य कला फाउंडेशन, झारखंड एगो सराहनीय पहल के माध्यम से युवा पीढ़ी के दोबारा किताब, साहित्य आ रचनात्मकता से जोड़त बा।

साहित्य कला फाउंडेशन झारखंड के एगो उभरत संस्था ह, जे अपना नाम के अनुरूप साहित्य, खासकर गद्य साहित्य के आज के युवा पीढ़ी तक पहुंचावे के अनूठा प्रयास कर रहल बा। पिछला दू साल से संस्था झारखंड के अलग-अलग कॉलेज में जाके विद्यार्थियन के साहित्यकारन से रूबरू करा रहल बा आ उनुका भीतर पढ़े-लिखे के रुचि पैदा करे के कोशिश कर रहल बा।

खबर भोजपुरी से बातचीत में संस्था के न्यासी डॉ. क्षमा त्रिपाठी जी बतवली कि साल 2026 में साहित्य कला फाउंडेशन अपना आयोजन के तीसरा संस्करण यानी ‘छाप 3.0’ लेके आ रहल बा। ई आयोजन 9 आ 10 अक्टूबर 2026 के जमशेदपुर के होटल अल्कोर, आउटर सर्किल रोड में बिहान 10 बजे से सांझ 6 बजे तक आयोजित होई।

मोबाइल से किताब तक ले जाए के कोशिश

डॉ. क्षमा त्रिपाठी बतवली कि ‘छाप’ आयोजन के सबसे मुख्य उद्देश्य आज के युवा पीढ़ी के किताब आ साहित्य के नजदीक ले आवल बा। उनका मुताबिक आज के बच्चा आ युवा मोबाइल के दुनिया में एतना उलझ गइल बाड़े कि रोजमर्रा के छोट-बड़ कामो मोबाइल पर निर्भर हो गइल बा।

पहिले लोग बाजार से सामान खरीदे खातिर कागज पर सामान के लिस्ट बनावत रहे। पेन आ कागज रोज के जिंदगी के हिस्सा रहल। बाकिर अब मोबाइल में सामान के लिस्ट बनावल जा रहल बा। एह बदलाव के असर पढ़ाई आ लेखन पर भी पड़ल बा।

डॉ. क्षमा जी के कहनाम बा कि आज के बच्चन के लिखे के आदत कम होत जा रहल बा। अगर आज के बच्चा के तीन पन्ना के कवनो लेख पढ़े आ लिखे खातिर दिहल जाव, त ऊ खुद पढ़े आ समझे के बजाय ओकर सार या जवाब खातिर सीधे ChatGPT जइसन तकनीक के सहारा ले सकेला।

हालांकि तकनीक आपन जगह उपयोगी बा, बाकिर साहित्य आ किताब के पढ़े के आदत के जगह कवनो तकनीक पूरा तरह ना ले सके। ChatGPT कवनो विषय के सार बता सकेला, बाकिर किताब पढ़ला से जे अनुभव, भाषा, कल्पना आ सोच विकसित होला, ऊ अलग चीज ह।

एह से युवा पीढ़ी में दोबारा पढ़े के आदत पैदा करे के जरूरत बा आ ‘छाप’ अइसने प्रयास के एगो हिस्सा ह।

कॉलेज के विद्यार्थी होखेलें आयोजन के केंद्र

‘छाप’ कार्यक्रम खास तौर पर कॉलेज के विद्यार्थियन के ध्यान में रख के आयोजित कइल जाला। एह खातिर साहित्य कला फाउंडेशन आ संबंधित कॉलेज के बीच एमओयू भी होला। आयोजन के दौरान कॉलेज में साहित्यकारन के बोलावल जाला, जे विद्यार्थियन से सीधे संवाद करेलें।

विद्यार्थियन के कहानी लेखन, कविता लेखन, ब्लॉग लेखन आ रचनात्मक लेखन के अलग-अलग पहलु के बारे में जानकारी दिहल जाला। लेखक लोग अपना अनुभव साझा करेला आ विद्यार्थियन के बतावेला कि एगो कहानी के शुरुआत कइसे कइल जाला, कविता के भाव कइसे विकसित होला आ ब्लॉग के रोचक आ प्रभावशाली ढंग से कइसे लिखल जा सकेला।

एह तरह के संवाद से विद्यार्थियन के किताब आ लेखकन के दुनिया से सीधा जुड़ाव होखेला।

पिछला साल देश के चर्चित लेखक रहलें शामिल

पिछला साल के आयोजन में कई प्रसिद्ध लेखक आ साहित्यकार शामिल भइल रहलें। एह में श्री रामदेव शुक्ल, जे ‘ग्रामदेवता’ जइसन चर्चित रचना के लेखक हउवें, से प्रो. मुन्ना पाण्डेय जी बातचीत कइले रहलें।

एहू तरह श्री अनिमेष मुखर्जी, ‘ठाकुरबाड़ी’ के लेखक, से सात्विक व्यास जी संवाद कइले रहलें। श्री कुंदन यादव, ‘गंडासा गुरु की शपथ’ के लेखक, से श्री सत्यार्थ अनिरुद्ध जी बातचीत कइले रहलें।

ई संवाद सत्र विद्यार्थियन खातिर खास रहल, काहेकि किताब में पढ़ल लेखकन के सामने बइठ के उनुका रचनात्मक यात्रा, लेखन प्रक्रिया आ अनुभव सुने के मौका मिलल।

कई भाषा के साहित्यकारन के एक मंच

‘छाप’ के एगो खास बात ई भी रहल बा कि इहाँ खाली हिंदी या अंग्रेजी भाषा के साहित्यकारन तक कार्यक्रम सीमित नइखे रहल। साहित्य कला फाउंडेशन अलग-अलग भारतीय भाषा के साहित्यकारन के एगो मंच पर ले आवे के प्रयास कइले बा।

पिछला आयोजन में उड़िया, बंगाली, अंग्रेजी, असमिया, संथाली, मगही आ झारखंडी भाषा के लेखक लोग शामिल भइल। एह पहल से अलग-अलग भाषा के साहित्य आ संस्कृति के एक-दूसरा से जुड़ल के अवसर मिलल।

आमतौर पर साहित्यिक आयोजन में कवनो एक भाषा के साहित्यकारन के संख्या अधिक रहेला। बाकिर ‘छाप’ में अलग-अलग भाषा के रचनाकारन के एक मंच पर लावल गइल, जेकरा से विद्यार्थियन के भारत के भाषाई आ साहित्यिक विविधता के बारे में जाने के अवसर मिलल।

कविता आ गीत से बच्चन के मनोरंजन

आयोजन में साहित्य के साथे मनोरंजन के भी खास ध्यान राखल गइल। पिछला साल चिन्मया त्रिपाठी आ जॉय मुखर्जी बचपन के कविता आ बच्चन के गीत के नया अंदाज में प्रस्तुत कइले रहलें।

उनुकर प्रस्तुति पर बच्चा आ विद्यार्थी खूब आनंद लिहलें। एह तरह कार्यक्रम में गंभीर साहित्यिक चर्चा के साथे संगीत आ मनोरंजन के भी संतुलन बनावल गइल।

‘छाप 3.0’ में जुटिहें देश के चर्चित साहित्यकार

डॉ. क्षमा त्रिपाठी बतवली कि एह साल के ‘छाप 3.0’ में देश के कई चर्चित लेखक आ साहित्यकार शामिल होखे वाला बाड़ें। एह आयोजन में पंकज मित्र, राकेश बिहारी, डॉ. दमयंती बेसरा, निर्मला पुतुल, भादो माझी, मुन्ना पाण्डेय, प्रशांत आनंद, विमल चंद्र पाण्डेय, नीरज मिश्र, अविनाश कुमार सिंह, रश्मि शर्मा, हिमांशु बाजपेयी, सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, विनीता अस्थाना, बेबी शॉ, सत्य व्यास, खालिद जावेद, युगल जोशी आ नवीन चौधरी जइसन लेखकन के मौजूदगी रहे के उम्मीद बा।

एह साहित्यकारन के मौजूदगी से विद्यार्थियन के लेखन, साहित्य आ रचनात्मकता के बारे में सीधे संवाद करे के अवसर मिली।

‘आगेन’ फिल्म के प्रदर्शन भी होई

‘छाप 3.0’ में साहित्य के साथे सिनेमा के भी खास जगह दिहल गइल बा। कार्यक्रम के पहिला दिन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त संथाली फिल्म ‘आगेन’ के प्रदर्शन कइल जाई।

फिल्म के निर्देशक श्री रविराज मुर्मू भी आयोजन में मौजूद रहिहें आ फिल्म निर्माण से जुड़ल अपना अनुभव दर्शकन के साथ साझा करिहें। संथाली भाषा आ संस्कृति पर आधारित फिल्म के माध्यम से दर्शकन के झारखंड के लोकजीवन, संस्कृति आ सिनेमा के एगो अलग रूप देखे के मौका मिली।

तबला आ कविता के अनोखा संगम

कार्यक्रम के दूसरा दिन साहित्य आ संगीत के एगो अनूठा मेल देखने के मिली। तबला पोएट्री के प्रस्तुति भूपेंद्र सिंह खिड़िया आ आशुतोष शिंदे के जोड़ी करी।

तबला आ कविता के एह अनोखा संयोजन से दर्शकन के एगो अलग तरह के कलात्मक अनुभव मिले के उम्मीद बा। एह प्रस्तुति के उद्देश्य साहित्य के पारंपरिक मंच से बाहर निकाल के नया अंदाज में दर्शकन तक पहुंचावल भी बा।

साहित्य के ‘बारिश’ में भींजे के मौका

आज जब मोबाइल, सोशल मीडिया आ डिजिटल सामग्री युवा पीढ़ी के समय के एगो बड़ा हिस्सा अपना ओर खींच रहल बा, तब किताब आ साहित्य से दोबारा जुड़ल एगो जरूरी चुनौती बन गइल बा। ‘छाप’ जइसन आयोजन एह चुनौती के सामना करे के कोशिश कर रहल बा।

9 आ 10 अक्टूबर 2026, जमशेदपुर के होटल अल्कोर, आउटर सर्किल रोड पर बिहान 10 बजे से सांझ 6 बजे तक आयोजित होखे वाला ‘छाप 3.0’ में साहित्य, भाषा, कहानी, कविता, सिनेमा आ संगीत के विविध रंग देखे-सुने के मिली।

डॉ. क्षमा त्रिपाठी आ साहित्य कला फाउंडेशन के ई प्रयास युवा पीढ़ी के किताबन के ओर लौटावे के दिशा में एगो महत्वपूर्ण कदम कहल जा सकेला। जरूरत बा कि युवा साहित्य के पढ़सु, लेखकन से मिलसु आ अपना भीतर के रचनात्मकता के पहचानसु।

त याद रखीं—9 आ 10 अक्टूबर 2026, जमशेदपुर के होटल अल्कोर में साहित्य के एह खास आयोजन से जरूर जुड़ीं आ साहित्य के एह बरखा में अपना मन के भींजे दीं।

‘खबर भोजपुरी’ के ओर से साहित्य कला फाउंडेशन के ढेरों शुभकामना आ बधाई। उम्मीद बा कि ‘छाप 3.0’ सफल होई आ साहित्य के युवा पीढ़ी तक पहुंचावे के ई अभियान आगे भी लगातार जारी रही।

जुड़ल रहीं ‘खबर भोजपुरी’ के साथ।

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