नई दिल्ली : 24 सितंबर 2002 के गुजरात के गांधीनगर में स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर पर भइल आतंकी हमला पूरा देश के हिला के रख दिहलस। एह हमला में तीन एनएसजी जवान समेत कुल 33 लोग के जान गइल। एनएसजी कमांडो के ऑपरेशन वज्र शक्ति से मंदिर में मौजूद हजारों श्रद्धालु के जान बचावल गइल, बाकिर 33 लोग के मौत ना टल सकल।
हमला के दौरान पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ल बतावल गइल फिदायीन आतंकी मुर्तजा हाफिज यासीन आ अशरफ अली मोहम्मद फारूक मुठभेड़ में मारल गइल। एकरा बाद गुजरात क्राइम ब्रांच आ जम्मू पुलिस के जांच में कई लोग के गिरफ्तार कइल गइल। पोटा कोर्ट 34 लोग के आरोपी बनवले रहे। एहमें चांद खान, अब्दुल कयूम आ आदम अजमेरी के मुख्य साजिशकर्ता बताके फांसी के सजा सुनावल गइल।
2010 में गुजरात हाईकोर्टो निचली अदालत के फैसला बरकरार रखलस। बाकिर मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट जांच एजेंसियन के दलील खारिज करत सभे 34 आरोपी के बरी कर दिहलस। कोर्ट जांच में गंभीर कमी पर सवाल उठावत कहलस कि असली गुनहगार अबहियो बाहर घूम रहल हो सकेलें। एह फैसला के बाद अक्षरधाम हमला के असली साजिशकर्ता के सवाल आजो अनसुलझल बा।
बरी होखे वाला आरोपी आ उनकर कहानी
चांद खान उर्फ शान:
चांद खान पर आरोप रहे कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियन खातिर कार खरीदववले, ओकरा में हथियार छिपावे के जगह बनववले आ जम्मू से बरेली होत अक्षरधाम मंदिर तक पहुंचवले। ऊ करीब 11 साल गुजरात जेल में रहलें। सुप्रीम कोर्ट से बरी भइला के बादो उनकर नाम कई बेर चर्चा में आइल।
आदम सुलेमान अजमेरी:
आदम अजमेरी पर आरोप रहे कि ऊ आतंकियन के ऑटो रिक्शा में बैठाके मंदिर के रेकी करववले। बाद में सुप्रीम कोर्ट से ऊ बरी हो गइलें। उनकर भाई अब्दुल राशिद, जेकरा पर विदेश से फंडिंग के आरोप लागल रहे, ऊ भी बरी हो चुकल बा।
मुफ्ती अब्दुल कयूम:
उनका पर आरोप रहे कि आतंकियन के जेब से मिलल चिट्ठी उन्हीं लिखले रहलें। हथियार छिपावे आ देश के खिलाफ साजिश के आरोपो लागल रहे। बाकिर सुप्रीम कोर्ट जांच के सबूत पर सवाल उठावत कहलस कि चिट्ठी बाद में आतंकियन के जेब में रखल गइल हो सकेला, काहेकि आतंकियन के कपड़ा खून से सानल रहे, जबकि चिट्ठी साफ-सुथरा रहे।
आजो लोग पूछेला—असली गुनहगार के बा?
अक्षरधाम हमला के 24 साल बादो सबसे बड़ा सवाल इहे बा कि 33 निर्दोष लोग के जान लेवे वाला हमला के असली साजिशकर्ता आखिर के रहे? 34 आरोपी बनावल गइल, लंबा कानूनी लड़ाई चलल आ आखिर में सभे बरी हो गइल। एहसे जांच के तरीका आ असली गुनहगार तक ना पहुंच पावे के सवाल आजो उठत बा।
बरेली में चांद खान के इलाका में लोग सार्वजनिक रूप से उनकर नाम लेवे से कतरात देखाई देलें। कुछ लोग कहेलन कि पुलिस के डर से ऊ कुछ ना बोलेलें। चांद खान के कहना बा कि पूरा इलाका जानेला कि उनकरा गलत तरीका से फंसावल गइल रहे।







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